डीजीपी से मिला ‘आप’ प्रतिनिधिमंडल, मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित फर्जी वीडियो साजिश की जांच और गिरफ्तारी की मांग
चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को कथित तौर पर बदनाम करने और पंजाब की शांति एवं सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने के उद्देश्य से वायरल किए गए एक कथित फर्जी वीडियो के मामले में आम आदमी पार्टी (आप) का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को पंजाब पुलिस प्रमुख से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने मामले की गहन जांच कर कथित साजिश के मास्टरमाइंड के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
वित्त मंत्री Harpal Singh Cheema के नेतृत्व में डीजीपी से मिले प्रतिनिधिमंडल में Aman Arora, Baltej Pannu तथा पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने डीजीपी को दो रिपोर्टें सौंपते हुए वीडियो तैयार करने और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।
मुलाकात के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की लोकप्रियता और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से यह कथित साजिश रची गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति या समूह को झूठी और भ्रामक सामग्री के जरिए जनता को गुमराह करने तथा प्रदेश की शांति भंग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
चीमा ने शिरोमणि अकाली दल पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी का इतिहास कई विवादों और पंथक मुद्दों से जुड़ी घटनाओं के आरोपों से घिरा रहा है। उन्होंने वर्ष 1986 के नकोदर प्रकरण और वर्ष 2015 की बेअदबी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मामलों में इंसाफ और जवाबदेही को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में गैंगस्टर संस्कृति को बढ़ावा देने में पूर्व सरकारों की भूमिका रही है, जबकि वर्तमान सरकार अपराध और संगठित नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। चीमा ने कहा कि पंजाब में शांति, भाईचारे और कानून-व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल ने डीजीपी से मांग की कि कथित फर्जी वीडियो बनाने, उसे प्रसारित करने और इसके पीछे शामिल लोगों की पहचान कर तत्काल गिरफ्तारी की जाए। हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यदि जांच में कोई व्यक्ति राज्य के बाहर या विदेश में भी शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
आप नेताओं ने कहा कि मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच से पूरी सच्चाई सामने आएगी तथा पंजाब में शांति और सामाजिक सद्भाव को प्रभावित करने की किसी भी कोशिश को कानून के दायरे में लाया जाएगा।