फगवाड़ा में अवैध अतिक्रमणों पर कब लगेगी लगाम? जनता का मेयर से सवाल—"आखिर और कितनी अपीलें?"
फगवाड़ा शहर में तंग बाजारों और सरकारी जमीनों पर लंबे समय से जारी अवैध अतिक्रमणों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। खासकर बरसात के मौसम में शहर के प्रमुख बाजारों—बंगा रोड, सिनेमा रोड तथा अन्य व्यस्त क्षेत्रों—की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि आम लोगों के लिए वहां से पैदल गुजरना भी किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है।
आरोप है कि कुछ दुकानदारों ने अपनी दुकानों के बाहर कई-कई फीट तक सरकारी जमीन पर सामान सजाकर अवैध कब्जा कर रखा है। इन अतिक्रमणों के कारण न केवल सड़कें संकरी हो गई हैं, बल्कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इसके बावजूद प्रभावशाली लोगों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई होती दिखाई नहीं देती।
शहर में जब भी अवैध अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जाता है, तब नगर निगम का बुलडोजर अधिकतर गरीब, दिहाड़ी मजदूर, रेहड़ी और फड़ी वालों तक ही सीमित रह जाता है। ऐसे में आम नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि क्या नगर निगम और पुलिस को दुकानों के बाहर किए गए स्थायी अवैध कब्जे दिखाई नहीं देते? लोगों का कहना है कि उन्हें रोजाना इन अतिक्रमणों के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है, लेकिन उनकी समस्याओं की ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा।
हैरानी की बात यह है कि ट्रैफिक पुलिस, नगर निगम और स्थानीय प्रशासन इस गंभीर समस्या से पूरी तरह अवगत हैं, फिर भी स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है। कुछ समय पहले एसएसपी कपूरथला गौरव तूरा ने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश जारी किए थे। वहीं एसपी फगवाड़ा माधवी शर्मा ने भी अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए प्रभावी पहल की थी। हालांकि समय के साथ प्रशासनिक सख्ती कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है और उच्चाधिकारियों के निर्देशों का पालन भी धरातल पर नजर नहीं आ रहा।
प्रशासन की इस ढुलमुल कार्यशैली से नाराज फगवाड़ा के लोग अब नगर निगम के मेयर रामपाल उप्पल से सीधे जवाब मांग रहे हैं। नागरिकों का सवाल है कि आखिर खुलेआम सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों को हटाने के लिए निगम और कितनी अपीलें जारी करेगा? लोग पूछ रहे हैं—"आखिर और कितनी अपीलें करोगे, मेयर साहिब?"
शहरवासियों का मानना है कि केवल अपीलों और चेतावनियों से समस्या का समाधान संभव नहीं है। यदि प्रशासन वास्तव में फगवाड़ा को अतिक्रमण मुक्त बनाना चाहता है, तो उसे बिना किसी भेदभाव के प्रभावशाली और आम व्यक्ति—दोनों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई करनी होगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि फगवाड़ा के बाजार आखिर कब अवैध कब्जों से मुक्त होंगे, या फिर यह समस्या केवल सरकारी फाइलों और अपीलों तक ही सीमित रह जाएगी?