जगतार सिंह हवारा की पैरोल को लेकर पंजाब में सियासत तेज, 10 दिन की पैरोल की सिफारिश
चंडीगढ़। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री Beant Singh हत्याकांड में दोषी Jagtar Singh Hawara की पैरोल को लेकर राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार हवारा को एक दिन की पैरोल दिए जाने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर इतनी कम अवधि की पैरोल लेने से इनकार कर दिया। बताया जा रहा है कि वह अपनी बीमार मां के साथ समय बिताने के लिए कम से कम 10 दिन की पैरोल चाहते हैं।
इसी मुद्दे को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक Gulab Chand Kataria से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने मानवीय आधार पर हवारा को 10 दिन की पैरोल दिए जाने की सिफारिश की है।
31 वर्षों बाद मां से मिलने की मांग
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि हवारा की मां लंबे समय से अस्वस्थ हैं और उनकी इच्छा अपने बेटे से मिलने की है। उन्होंने कहा कि लगभग 31 वर्षों के बाद मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए हवारा को अपनी मां से मिलने का अवसर दिया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री के अनुसार पंजाब सरकार ने औपचारिक रूप से 10 दिन की पैरोल की मांग रखी है। उन्होंने बताया कि चूंकि मामला केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ा है, इसलिए सिफारिश आगे भेजी जाएगी और अंतिम निर्णय केंद्र सरकार, विशेष रूप से गृह मंत्रालय के स्तर पर लिया जाएगा।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने का आश्वासन
भगवंत मान ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल को भरोसा दिलाया है कि यदि हवारा को पैरोल दी जाती है तो पंजाब सरकार कानून-व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी निभाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पैरोल अवधि के दौरान किसी प्रकार की नारेबाजी, विरोध प्रदर्शन, हुड़दंग या सार्वजनिक शांति भंग करने वाली गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हवारा की रिहाई की मांग को लेकर सक्रिय कुछ धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने भी शांति बनाए रखने का आश्वासन दिया है। इसी आधार पर सरकार ने पैरोल की सिफारिश की है।
अंतिम फैसला केंद्र सरकार के पास
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने मामले में केंद्र सरकार से संपर्क कर आवश्यक औपचारिकताओं को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद हवारा को अपनी बीमार मां से मिलने का अवसर मिल सकेगा।
फिलहाल पैरोल संबंधी अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है और इस मुद्दे पर राजनीतिक तथा सामाजिक स्तर पर चर्चाएं जारी हैं।